The memories lane

 मैं जब अपने बचपन के बरसात के दिनों को याद करता हूँ तो वह टप -टप पानी की बूंदों की आवाज, छत पर जाकर पानी में भीगने, अपने साथियों के साथ मिलकर कीचड़ में दौड़ना,आसमान में इनदरधनुष का देखना, भीगने के बाद कपड़े से बदन को पोछने,कागज की कश्ती बनाकर पानी में रखना, बिजली का कङकना।बादल का गरजना, बारिश में भीगने से सर्दी-खांसी का होना, छाता लेकर निकलना और फिर तेज हवा के कारण छाता का उलटना, बरसात में धान की खेती होना, पक्षीयो की सुहानी आवाज सुनना इत्यादी।

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