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Showing posts from November, 2020

केंद्र सरकार और राज्य सरकार के पाठ्यक्रम

  यह प्रतिफल अलग-अलग हित धारकों को सक्षम करने के लिए तथा शिक्षकों और शिक्षार्थियों के बीच के संबंध को मजबूत करने के लिए बनाए गए हैं ताकि शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को एक निश्चित और वांछित दिशा प्रदान किया जा सके एवं शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को रुचिकर एवं चित स्थाई बनाया जा सके

रुब्रिक के विचार

  हाँ क्यों कि यह शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों के लिए सहभागिता पूर्ण तरीके से विकसित किया गया है रुब्रिक्स में लचीलापन वह अनुकूलन की क्षमता होती है यह विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया सोच को बढ़ाती है एवं शिक्षण विधियों को परिष्कृत करने में सहयोग करती है इसमें मापन स्तर एवं डेटा संग्रह आदि के माध्यम से आकलन किया जाता है

कला समेकित शिक्षा

  यह मॉड्यूल शिक्षार्थियों को अपने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में कला को समेकित करने में, सीखने में, और अभ्यास करने में सक्षम बनाता है। यह मॉड्यूल कला समेकित शिक्षण गतिविधियों को योजना बनाना, विभिन्न तरीकों का उपयोग करना जैसे कि कला आधारित आइस-ब्रेकर, बुद्धिशीलता, कला निर्माण, विचारणा, कल्पना, खोज, अवलोकन, प्रतिबिंबित, स्वतंत्र रूप से व्यक्त करना, लेखन आदि सभी गतिविधियाँ ,प्रयोगिक अनुभूति की परिकल्पना से बनाए जाने आदि को समेकित करता है । कला समेकित शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षार्थी को प्रदान पर्याप्त जानकारी प्रदान करने में सहायक होता है

मीडिया के द्वारा जेंडर विभेद का चित्रण

  वैसे तो किसी भी व्यवसाय में लिंग भेद उचित नहीं माना जा सकता परन्तु हम लिंगभेद को बढ़ावा ना दे इसकी शुरुआत हमें स्कूली शिक्षा से ही करनी होगी। स्कूल वह स्थान है जहां पर हम छात्र व छात्राओं के निकट संपर्क में रहते है। अतः सभी शिक्षकों को लिंगभेद के पूर्वाग्रहों से ऊपर उठ कर कार्य करना चाहिए तभी हमारी भावी पीढ़ी का नव निर्माण हो सकेगा तभी हमें यह मानना चाहिए कि हम सच्ची शिक्षा दे पाए। जेंडर के मीडिया चित्रण का विश्लेषण इस तरह से इस वीडियो (https://youtu.be/y4QxRV4pMcI) में भी बहुत ही अच्छे तरीके से दर्शाया गया है कि "असमानता सीखी जाती है, और समानता को शिक्षण की आवशकता है. असमानता जाने या अंजाने बच्चे सीख जाते हैं आस पास वाले लोगो से क्योंकि बुजुर्ग लोग इसे सही मानते है और उन्होंने असमानता को उसी प्रकार मान लिया है। लेकिन समानता को समझने के लिए खुले विचार और सबको समान रूप से देखने की मानसिकता होनी बहुत हीं आवश्यक हैं, तभी हम समानता को अपनी आने वाली पीढ़ी को दे सकेंगे। समानता को बढ़ावा देने वाला ये विज्ञापन भी बहुत प्रभावशाली है, जिसमे पुरानी धारणाओ का खंडन बहुत ही सहज तरीके से किया ग...

सूचना एवं संचार तकनीकी से मूल्यांकन

  आईसीटी के विभिन्न आयामों का सहारा लेकर हम शिक्षण को प्रभावी एवं आकर्षक बनाते हैं ।इससे बच्चों में स्थायी अधिगम होता है ।इसके द्वारा सीखी गई बातें हमारे मस्तिष्क - पटल पर दीर्घ अवधि के लिए सुरक्षित हो जाती है।इसका उपयोग सूचना एकत्र कर पुनः प्राप्त करने एवं प्रेसित करने में किया जा सकता है।

The memories lane

  मैं जब अपने बचपन के बरसात के दिनों को याद करता हूँ तो वह टप -टप पानी की बूंदों की आवाज, छत पर जाकर पानी में भीगने, अपने साथियों के साथ मिलकर कीचड़ में दौड़ना,आसमान में इनदरधनुष का देखना, भीगने के बाद कपड़े से बदन को पोछने,कागज की कश्ती बनाकर पानी में रखना, बिजली का कङकना।बादल का गरजना, बारिश में भीगने से सर्दी-खांसी का होना, छाता लेकर निकलना और फिर तेज हवा के कारण छाता का उलटना, बरसात में धान की खेती होना, पक्षीयो की सुहानी आवाज सुनना इत्यादी।

प्रतिबिम्ब

  कला समेकित शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जहां कला शिक्षण का माध्यम बन जाती है, और इस प्रकार के शिक्षण से बच्चे अच्छे गतिविधि के साथ और रोमांच के साथ उस विषय को सीख लेते हैं और जीवन पर्यंत याद रखते हैंl इस तरीके से सीखना समग्र आनंददायक और अनुभव आत्मक बन जाता हैl

सामाजिक मानदंड और व्यवहार का विवरण

 1. पुत्र पारिवारिक संपत्ति के कानूनी उत्तराधिकारी हैं 2.लड़कियों का शीघ्र विवाह 3.पुरुष देखभाल करने वाले/पोषण करने वाले 4..दहेज प्रथा 5.बेटियों पर बेटों को वरीयता 6.मासिक धर्म की वर्जनायेँ 7.लड़कियों की शारीरिक गतिशीलता पर प्रतिबंध 8.लड़कियाँ परिवार की अस्थायी सदस्य हैं उपर्युक्त 1 से 8 तक सभी लैंगिक असमानता को दर्शाता है।सामाजिक रूढ़ि वादी विचार के कारण ही खान-पान, रहन-सहन,पढ़ाई-लिखाई आदि में बेटियों पर बेटों की वरीयता दी जाती है।जिसके कारण लैंगिक विभेद उत्पन्न होता रहा।परंतु वर्तमान में स्थिति थोड़ी बदली है।अब लड़कियाँ भी सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं।यहाँ तक कि लड़कों को भी पीछे छोड़ रहीं हैं। दहेज प्रथा:- दहेज प्रथा भारतीय समाज में एक कोढ़ के समान है। यदि महिलाओं की दिशा और दशा सुधारनी है तो दहेज रूपी कोढ़ का इलाज करना ही होगा। बेटियों पर बेटों को वरीयता वैसे तो अब समाज में काफी बदलाव आया है लेकिन अभी भी बेटों को वरीयता देना दिखाई देता है। इसे हमें पूर्ण रूप से समाप्त करना होगा। मासिक धर्म की वर्जनायेँ हमारे समाज में अनेकों भ्रांतियाँ इस सम्बंध में फैली हुई हैं। हमें उन भ्रांतियों ...

https://cdprasadhm.blogspot.com/2020/11/ict-in-education.html?m=1

ICT in education

ICT integration in teaching and learning largely depends upon motivation of teachers.If teacher will be trained in ict ,they teach student using ict tool in proper manner